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स्वच्छ भारत

स्वच्छ भारत पहल

राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान (एनआईआरडीपीआर), हैदराबाद में स्वच्छ भारत मिशन शुरू हो गई है, ताकि दूसरों के आंगन को सही तरीके से स्थापित करने से पहले स्‍वयं के आंगन को सही स्थापित कर ले। इसमें कुछ स्थानीय पद्धतियां है जो स्वच्छ भारत के मूल्यों और सिद्धांतों के साथ संरेखित नहीं थे उन्‍हें सहीं करने के लिए आंतरिक उपायों की एक श्रृंखला है। परिसर के भीतर आंतरिक उपायों को इस प्रकार प्रस्‍तुत किया गया है ‘पहले – बाद में’ नीचे, इसके बाद इन पद्धतियों को बड़े समुदाय तक हम कैसे फैला सकते है।

एनआईआरडीपीआर निम्नलिखित सिद्धांतों में विश्वास रखता हैं:

  1. कई छोटे करने योग्‍य अभ्‍यास कालांतर में आदत बन जाते है :
  2. चैरिटी घर से शुरु होती है - सबसे पहले, आईए अपने घर को व्‍यवस्थित रख ले।
  3. स्वच्छ भारत का एहसास करने का सबसे अच्छा तरीका व्यक्तियों को स्वच्छ नागरिक के रूप में परिवर्तित करना है, और इसका विस्तार करना है;
  4. प्रदर्शन करना। उन्हें बताएं - आपके प्रकट व्यवहार दिनचर्या के माध्यम से - स्वच्छ नागरिक होने का क्या मतलब है।
  5. स्वच्छ भारत हमारे व्यवहार के एक नए सेट को स्थापित करने में सक्षम है, जो भारत को स्वच्छ रखने के लिए अनुकूल है, साथ मिलकर सफाई करना - और न कि केवल सफाई करना।

दूसरों को सक्षम बनाने से पहले हमें पूर्णत: सक्षम होना चाहिए। इसलिए, हम सक्षम बनने, और प्रदर्शन करने में सक्षम होने का अभ्यास करते हैं।

स्वच्छ भारत से - पहले स्वच्छ भारत के – बाद
प्लास्टिक कैरी बैग का उपयोग होता था संस्थान ने प्लास्टिक कैरी बैग के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है, और पुन:उपयोग करने योग्‍य कपड़े के बैग और पर्यावरण अनुकूल गैर बुना बैग के उपयोग को बढ़ावा देता है।
सम्‍मेलन कक्ष में प्लास्टिक पानी बोतलों का इस्तेमाल करना चलन में था संस्थान ने प्लास्टिक पानी बोतलों के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है, और डाइनिंग हॉल; सम्मेलन कक्ष; और कार्यालय के कॉरिडारों में पानी डिस्पेंसर के माध्यम से पानी प्रदान किया जाता है।
मंच पर प्लास्टिक पानी बोतलों को रखने की पद्धति चल रही थी। कैप के साथ पुन:प्रयोज्य कांच की बोतलों को प्रतिस्थापित किया गया है।
हमने अपने कार्यालयों में प्लास्टिक फ़ाइलों और फ़ोल्डरों का उपयोग करते थे प्लास्टिक के फोल्डर और फाइलों के उपयोग के बदले एनआर्इआरडीपीआर हस्तनिर्मित पेपर फ़ाइलों और फ़ोल्डरों के उपयोग को बढ़ावा देता है।
हम अतिथियों को प्लास्टिक शीट से लिपटे फूलों के गुलदस्ते पेश करते थे। संस्थान केवल ताजे फूलों के गुलदस्ते का उपयोग करता है और यह सुनिश्चित करता है कि गुलदस्ते में प्लास्टिक आवरण का उपयोग न किया जाए।
हम यूज एंड थ्रो पेपर कप और पेपर प्‍लेट में चाय/ बिस्कुट परोसते थे यूज एंड थ्रो पेपर कप और पेपर प्‍लेट का उपयोग नहीं किया जाता है। चाय/ बिस्कुट परोसने के लिए पुन:उपयोगी सेरामिक चाय कप/ स्टेनलेस स्टील ग्‍लास; और पुन:उपयोगी प्‍लेटों का उपयोग किया जाता है।
भोजन कक्ष में कूड़ा पृथक्करण नहीं हुआ करता था। भोजन कक्ष में अपशिष्ट पृथक्करण की व्यवस्था की गई है ताकि संस्‍थान में स्‍थापित गैसीकरण संयंत्र में रसोई अपशिष्‍ट को भेजने की पद्धति से परिचय हो सके।
कांच की बोतलें, रिसाइकिल योग्‍य प्लास्टिक कंटेनर आदि सहित सूखे कचरे पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता था। स्क्रैप डीलरों की पहचान की गई है, जो रिसाइकिल प्लास्टिक, और अन्य स्क्रैप को ले जाने के लिए समय-समय पर परिसर का दौरा करेंगे।
कार्यालय, और स्कूल से प्राप्‍त उपयोग किए गए कागजात को समय-समय पर जलाए जाते थे कार्यालय और बीवीबीवी स्कूल से प्राप्‍त होने वाले उपयोग किए गए कागजात को ग्रामीण प्रौद्योगिकी पार्क में स्थित हस्तनिर्मित कागज इकाई को भेजे जा रहे हैं।
इस्तेमाल किए गए स्त्री उत्पादों, और शिशुओं के लंगोटी का निपटान - अन्य कचरे के साथ मिल जाता था। सुरक्षित निपटान के लिए अनसेनिटर स्थापित किया जा रहा है।
स्टाफ क्वार्टर में अपशिष्‍ट पृथक्‍करण नहीं हुआ करता था एनआर्इआरडीपीआर जल्द ही परिसर में रहने वाले परिवारों को तीन अपशिष्ट डिब्बे देगा। उन्हें कचरा पृथक्‍करण पर शिक्षित किया जाएगा।
स्‍कूली बच्‍चों को अभिमुखीकरण Bharati Vidya Bhavan Vidyashram के छात्रों को अपशिष्ट प्रबंधन के 3आर से परिचित किया गया है।
पीजीडीआरएम छात्रों को अभिमुखीकरण ग्रामीण प्रबंधन में स्‍नातकोत्‍तर डिप्‍लोमा के छात्रों को अपशिष्ट प्रबंधन के 3आर से परिचित किया गया है।
एनआईआरडीपीआर महिला मंडली एनआईआरडीपीआर महिला मंडली के सदस्यों को कचरा पृथक्करण/ प्रबंधन पर जानकारी प्रदान किया गया है।
आंतरिक रूप से तैयार अगस्त 2016 में, एनआईआरडीपीआर के स्वच्छता अनुबंध को संशोधित किया गया है, जो कि पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय और एमओयूडी द्वारा जारी किए गए स्वच्छ कार्यालय एसओपी के अनुरूप है।

एनआईआरडीपीआर परिसर के प्रत्येक कर्मचारी और निवासी स्वच्छ नागरिक बनने की दिशा में लगातार अभ्यास करते हैं, और अपने आप को लगातार सुधारते रहते हैं।

अन्य पहल

  • एनआईआरडीपीआर परिसर में स्थित भारतीय विद्या भवन विद्याश्रम (बीवीबीवी) के बच्चे समय-समय पर श्रमदान के माध्यम से परिसर की सफाई में शामिल होते हैं। वे परिसर में पेड़ भी लगाते हैं।
  • एनआईआरडीपीआर ने जैव-विविधता दिवस मनाया और उसी दिन यह घोषणा की कि एनआईआरडीपीआर मार्च 2017 तक जीरो वेस्‍ट के लक्ष्य तक पहुँच जाएगा।

एसबीएम –एनआईआरडीपीआर

हम निम्नलिखित विषयों पर कार्यशालाएं और 5-दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करते हैं। हमारे ग्राहक पूरे भारत के जिला और राज्य स्तरों के एसबीएम गतिविधियों को लागू करने वाले अधिकारी हैं।

  • व्यवहार परिवर्तन संचार
  • व्यक्तिगत स्वच्छ शौचालय निर्माण के लिए प्रौद्योगिकी विकल्प
  • ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन
  • ग्रामीण स्वच्छता संवर्धन के लिए सामाजिक विपणन रणनीतियाँ

हमने हस्‍तपुस्तिका, और आईईसी सामग्री जैसे कि पोस्टर, पत्रक, और फ़ोल्डर प्रकाशित कराया है, जो एसबीएम के विचार को आगे बढ़ाते हैं। हस्‍तपुस्तिका में शामिल हैं:

  1. व्यवहार परिवर्तन संचार रणनीतियाँ
  2. ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन
  3. ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए मॉडल उप-नियम
  4. ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए डीपीआर तैयार करने पर दिशानिर्देश
  5. ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर सफल कहानियां – सभी राज्‍यों से मामला अध्‍ययन श्रृंखला

दस्तावेज़

ग्राम पंचायत विकास योजना - जल जीवन मिशन ढांचे के भीतर
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन हेतु समूह दृष्टिकोण
'कचरे से संपदा' पर चर्चा का एक अस्थायी मद।
ग्रामीण विकास योजना में सहभागी ग्रामीण मूल्यांकन पीआरए अनुप्रयोग
Hand-washing Practice
Gram Panchayat Development Plan - Within the Framework of Jal Jeevan Mission
Cluster Approach to Solid Waste Management
A tentative end to the debate on 'Waste to Wealth'.
Participatory Rural Appraisal PRA Application in Rural Development Planning
Capacity Building for Community Engagement (Building Self-Sustaining 'Village Republics' through UBA)
Plastic Waste Management (Frequently Asked Questions)
Small-scale Domestic Wastewater Management Project
Visit to a Zero Waste Project in Andhra Pradesh(A Case Study of Pakala in Chittor District)
Plastic Waste Management (Frequently Asked Questions)
ODF Index - Indicators and Weightages
ODF - Story with a Gap
Social & Behaviour Change Communication for Rural Sanitation Professionals
ODF Sustainability - Notes and Readings for the Trainers & Field Functionaries
How to Write a Good Research Proposal (A Practical Guide to Beginner Researchers)
SOP for Swachh Campus(Hindi)
Solid Waste Management (A Step-by-Step Guide for Gram Panchayats) Handbook
SOP for Swachh Campus(English)
Zero waste is possible
Historical Waste & Garbage Mining
Taking on a Zero Waste Challenge
Composting Kitchen Waste - Basic Questions and Answers FAQs
Leadership Matters for Sustainability of Sanitation Efforts
(The Case of Hazipally Gram Panchayat in Telangana State)
Case Study
Solid Resource Management in Kurudampalayam Panchayat, Tamil Nadu: A Classic Case that Transforms Waste into Resource Case Study
Solid Waste Management System in Mudichur Gram Panchayat, Kancheepuram District, Tamil Nadu: A Model for Replication Case Study
A Model Bylaw for Solid Waste Management in Gram Panchayats Model Bylaw
Village Adoption
A Praxis-based Approach to Community Engagement by Institutions of Higher Learning
Unnat Bharat Abhiyan
Kitchen waste from one more household… Theory of Social norms
Mission: Clean India 2019 (India’s Sanitation Marketing Strategies) Sanitation Marketing
Behavioural and Social Change Communication - Part 1 Module
Behavioural and Social Change Communication - Part 2 Module
Behavioural and Social Change Communication - Part 3 Module
Behavioural and Social Change Communication - Part 4 Module
Behavioural and Social Change Communication - Part 5 Module

 

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